मशीनों का गुलाम

मशीनों का गुलाम

आज का मानव देखो बना है
उन मशीनों का गुलाम
जो स्वयं बनाई मानव ने
लगा मेहनत ओर अपनी जान।
मशीनें बनाई मानव ने ही
पर गुलाम यह बन गया
आज नाम है मिट चला
धरती से मानव जाति का
खुद ही जैसे हो गया है
मशीनों पर मानव कुर्बान,
आज का मानव देखो बना है
उन मशीनों का गुलाम ।
हर काम पूरा करती हैं मषीनें
हंसाती, रूलाती, खिलाती हैं मशीनें
हल्का हो चाहे भारी सामान
खुद बोझा उठाती हैं मषीनें
जोखिम भरा हर काम हैं करती
नही करती हैं कभी आराम,
आज का मानव देखो बना है
उन मशीनों का गुलाम ।
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One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/12/2015

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