ला दोगे क्या …

ला दोगे क्या …

तारों भरी रात चाहिये मुझे
ला दोगे क्या
चाँद को जलने दो
नैनों से पिरो लेंगे वो बारात ।

फूलों भरी वादी चाहिए मुझे
ला दोगे क्या
भँवरों को तरसने दो
फूलों की महक से करेंगे मुलाक़ात ।

ढलता सूरज चाहिए मुझे
डुबो दोगे क्या
उसकी लाली को पिघलने दो
पूछेंगे कैसे करता हर दिन करामात ।

गहरा समंदर चाहिए मुझे
ठहरा दोगे क्या
लहरों को संभलने दो
बहते पानी में ढूंढेंगे जज़्बात ।

— स्वाति नैथानी

3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/12/2015
  2. Hitesh Kumar Sharma Hitesh Kumar Sharma 02/12/2015
  3. नवल पाल प्रभाकर नवल पाल प्रभाकर 02/12/2015

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