ग़ज़ल –: दिलों का दर्द है ऐसा ॥

॥ दिलों का दर्द है ऐसा ॥ गजल

दिलों का दर्द है ऐसा जताने मे मजा आता ।
छिपाने का मजा अपना बताने मे मजा आता ।

भरे इन जख्म मे अपना कोई मरहम लगा जाये ।
ऐसे जख्म की पीडा उठाने मे मजा आता ।

दिलों के दर्द को अपना समझे वही हमदम ।
दिलवर उसे अपना बनाने मे मजा आता ।

कहीं जब भूल वस अपनी अपना रूठ जाए तो ।
लुभाने का मजा अपना रिझाने मे मजा आता ।

लगे अब प्यार करने मे तराने दर्द के मीठे ।
जब गम हों जुदाई के महखाने मे मजा आता ।

अनुज तिवारी .

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 02/12/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 08/12/2015

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