मैली चादर मैल से, कदी चढ़े ना रंग

मैली चादर मैल से, कदी चढ़े ना रंग ।
इसे अन्तकरण में, जब तक मैल कुसंग ।।

जब तक मैल कुसंग शुद्ध कैसे हो जाता ।
निष्फल है उपदेस गुरु चाहे मिलें विधाता ।।

गंगादास जन कहें रहे जब तक बदफैली ।
कदी रंग ना चढै चित्त चादर है मैली ।।

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