तेरा उलझा दामन

तेरा उलझा दामन कहीं मेरी उलझन न बन जाये
तेरी याद दिलाने तो अब रात के साये भी न आये
शुक्र मना कातिल तेरा दिल किसी ने नहीं तोड़ा है
पर तेरे झूठ ने मेरे दिल को जाने कितना तोड़ा है,
रात का दुश्वार अंधेरा कहीं मेरा प्यार न बन जाये
दिल तोड़ा जिस सच ने उस झूठ को कैसे झुठलायें
दिल दिया तुझको पर तेरी धड़कन हम न बन पाये
दर्द को तन्हा दिल में छुपाकर कैसे हम मुस्कुराऐं,
कहते हैं कफन जिसे कहीं तेरा दामन न बन जाये
लिपट कर तेरे उलझे दामन में हम कहीं खो न जायें
दिल में बसी तेरी तस्वीर को हम मिटा न पायेंगे
चाहो न चाहो तुम्हरी याद में जिन्दगी छोंड़ जायेंगे।

………………………. कमल जोशी

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