॥॥ उडता दबंग ॥॥

पुलकित है अंग
दिल मे उमंग …..
बेखौफ यहाँ उडता दबंग ।

अपनो के संग
खुशियों के रंग….
बेखौफ यहाँ उडता दबंग ।

यारों से मै यारी करता
कभी नही गद्दारी करता ।
सब मेरी नजरों मे होते है
दुश्मन सपनो मे रोते है ।
काँप उठे दुश्मन के अंग ।
वेखौफ जहाँ उडता दबंग ।।

भाईजान हूँ मै बजरंगी
ख्वाब मेरे सच्चे सतरंगी ।
कदम पडे ये मेरे जहाँ पर
थर-थर काँपे लोग वहाँ पर ।
हूँकार भरे उठती तरंग ।
वेखौफ जहाँ उडता दबंग ।।

अनुज तिवारी

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  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/11/2015

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