ग़ज़ल

हो काँटों भरा पथ , पर रूकना नहीं |
मिले यदि चुनौती, तो डरना नहीं |
अपनों से मिलकर ,सदा ही रहो तुम,
सुख दुःख के भागी, वो लड़ना नहीं |
धन यदि मिले ,या कभी न मिले ,,
पर लालच में आकर बिकना नहीं |
साथ देना सदा ही , सच का यहाँ ,
कभी असद के सम्मुख झुकना नहीं |
हो रहा हो जहाँ, न्याय पर अतिक्रमण ,
बन धृतराष्ट्र तुम मूक रहना नहीं |
अत्याचारों , अनाचारों की श्रृखंला ,
तोड़ दो अब उन्हें उसमें बँधना नहीं |
रोज होता जहाँ पर एक सीता हरण ,
मजबूरी समझ उसको सहना नहीं |
दीप बनकर के तुम ऐसे जलते रहो ,
आँधी – तूफ़ान में भी बुझना नहीं |
हौसलों से मिलेगीं , सभी मंजिलें ,
पंकज चल ही दिये अब मुड़ना नहीं |
@आदेश कुमार पंकज

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/11/2015

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