शायरी

इंसानियत कही नहीं लेकिन धर्म बहुत है
ज़िन्दगी छोटी सी है लेकिन अरमान बहुत है ,
सोचता हु बढ़ती उम्र के साथ थोड़ी मासूमियत ही बचा लू ,
यहाँ ज़िंदगानी के लिए जगह नहीं लेकिन शमशान बहुत है !!!

Leave a Reply