* किसी को कोई क्यों याद करता *

मनो या न मनो ऐ बात है सही

लोग जाल से न बंधे रहते तो

किसी को कोई याद करता ही नहीं ,

खुदा गॉड ईश्वर हो या भगवान

सभी को चाहिए इन से अपना कल्याण

तभी तो ऐ करते हैं पूजा अर्चना प्राथना

या देते हैं अजान

डर न हो इन से तो लोग क्यों लेते इनका नाम ,

मनो या न मनो ऐ बात है सही

लोग जाल से न बंधे रहते तो

किसी को कोई याद करता ही नहीं ,

पहचान सत्ता शक्ति सम्पति

सभी को है भाता

इनका स्रोत हैं जन्मदाता

ऐसा न होता तो लोग उसे भी भूल जाता ,

मनो या न मनो ऐ बात है सही

लोग जाल से न बंधे रहते तो

किसी को कोई याद करता ही नहीं ,

लोग क्यों याद करते ईतिहास और भूगोल को

दार्शनिको के दर्शन विचारको के विचार

नौकरशाह और नेताओ के रौल को

उन्हें चाहत न होती बड़े बनने का

न पानी होती नियुक्ति ,

मनो या न मनो ऐ बात है सही

लोग जाल से न बंधे रहते तो

किसी को कोई याद करता ही नहीं ,

सगे सम्बन्धी हो या रिस्ता नाता

सभी को है एक दूसरे से आशा

आशा छूटी विश्वास टूटी

भूल जाते हैं ऐसे जैसे पुराने घर की पुरानी खुट्टी ,

मनो या न मनो ऐ बात है सही

लोग जाल से न बंधे रहते तो

किसी को कोई याद करता ही नहीं ,

हम ने आजमाया है संग उनके खाया है

वह हमें छोड़ने रेलवे स्टेसन भी आया है

कुछ दिन बाद उनसे हुई मेरी बात

भूल गए थे वे हमें

क्योंकि उन्हें नहीं पड़ी मेरी सरोकार ,

मनो या न मनो ऐ बात है सही

लोग जाल से न बंधे रहते तो

किसी को कोई याद करता ही नहीं ,

नरेन्द्र कुमार पर 4:35 am

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