तू मेरे बस की बात नहीं है

तेरे संग दो पल बिताना
सोंचा पर आसान नहीं है
कांटो के पथ पर संग-संग चलना
नामुमकिन ये काम नहीं है।

जीवन का संग्राम मिटाना
ये मेरे बस की बात नहीं है
आशाओं का एक दीप जलना
ये तेरे बस की बात नहीं है।

सोंचू क्या? अब कोई बात नहीं है
मेरे संग अब तेरा साथ नहीं है
खुशियों का अब आभाष नहीं है
तू मेरे बस की बात नहीं है।

बाते है पर आवाज नहीं है
तू है पास पर साथ नहीं है
आंखे है पर आँसू नहीं है
तू मेरे बस की बात नहीं है।

-संदीप कुमार सिंह ।

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