पापी के कोई भूलकर, मत ना बसो पडौस

पापी के कोई भूलकर, मत ना बसो पडौस ।
नीच जनों के संग में, निर्दोषी गहें दोस ।।

निर्दोषी गहें दोस, दोस देते दुःख भारी ।
बिगड़ जाय दो लोक भीख ना मिलै उधारी ।।

गंगादास कहें नीच संग डूबें परतापी ।
तजै गाम, घर, देस, जहाँ बसते हों पापी ।।

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