खलीफा

कहता है खुद को खलीफा ओ दरिन्दे ……
शैतान है तू और, जालिम है तेरे कारिंदे |

कहते हो खुद को खुदा का रहनुमाई ,
करते हो हरकदम बदी से तुम आशनाई |

जिसके खून से तू वजू करता खलीफा ,
है नही वो गैर , तेरे अपने वासिंदे |

बमों-बन्दूक के साए में ,
क्या कोई मजहब पनपता है |
लाशों से पटी धरती पर ,
बस नफरत सुलगता है |

सरे बाजार तू अपनी औरतें नीलाम करता है ,
बना मासूम को फिदायी ,कौन सा जेहाद करता है |

कसम खाई है तूने की ,
मिटा देगा तू काफिर को –
वो भी पक्का नमाजी था जिसे पिंजरे में भूना था |

तू तो खुद भी मुआज्जिन था उसी मीनार का पगले ,
जहा से आज कत्लेआम का , तू खुद फरमान देता है …………..

3 Comments

  1. asma khan asma khan 25/11/2015
  2. Rinki Raut Rinki Raut 25/11/2015
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/11/2015

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