ये आंखें

ये आंखें

नही ये आंखें
मेरे देश की नही हैं।
मेरे देश की आंखों में
शर्म लाज का भाव है
चंचल ईधर-ऊधर भटकती
दूसरे देश की ओर मटकती
नही ये आंखें
मेरे देश की नही हैं।
पलकें झुकी-झुकी सी
निगाहें एक जगह रूकी-सी
आंखों में एक अनोखी चमक
बड़ों की इज्जत की कसक
हां ये आंखें ही
मेरे देश की आंखें हैं।
-ः0ः-

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