||तनहा मौसम और तुम ||

“काश |तुम्हे भुलाना आसान होता
तेरी यादों को मिटाना आसान होता
ना होती फिर तकलीफ कभी
जो तन्हाई को निभाना आसान होता ,

ना करते हम प्यार कभी
जो दिल को बहकाना आसान होता
होते हम सपनो के मालिक
जो आँखों में बसना आसान होता ,

बातें वो मीठी-मीठी सी
छलकती थी जो इन अधरों से
ख्वाब नए सजते थे रोज
सागर सी नीले नयनों में ,

तन्हाई के इन अश्को को
अंजाम दिलाना आसान होता
होते जो तुम साथी तन्हाई के
तो खुद को भुलाना आसान होता ,

गैरों की दुवाएं आसान होती
सदाकत में जो तुम मेरे होते
हम भी बुनते सपनो की माला
पास जो गर तुम मेरे होते ||”