मै हू…………!

मै हूँ इँदिरा , मै हूँ सीता, मै ही दुर्गा कली हूँ ………..!
तोङ पुरानी बेङियो को आज नयी कहानी हूँ………!
मै नही पुरानी हूँ , मै आज की ही नारी हूँ…….!
तोङ जमाने की रस्मो को आज नयी रवानी हूँ……….!
मै सीता हूँ , मै हूँ इँदिरा, मै ही दुर्गा काली हूँ…….!
मै नदियाँ सी , मै चंचल सी, मै ही बहता पानी हूँ………!
मै माता ,मै ही ममता , मै ही जग की जननी हूँ………!

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 23/11/2015
  2. asma khan asma khan 23/11/2015

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