मुक्तक-सच्चाई-शकुंतला तरार

मुक्तक-सच्चाई

सागर सी गहराई हो
परवत सी ऊंचाई हो
जगह बनाना है जग में
दिल में भी सच्चाई हो
शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)

Leave a Reply