हमारी विनती

संयोग से हम यहाँ चले आए
भविष्य की चिंता बहुत सताये
आप ने उम्मीद की किरण जगाए
मन को हमारे सुकून पाहुचाए।

सुरूज़ की किरणे उजियारा फैलाए
आलस है दुशमन, आप दूर भगाये
हमे ज्ञान का फथ पढाए
उम्मीद हम यह आप से लगाए।

शीतल चंचल मन कुछ कर जाए
अकर्म के पथ हम जब अपनाए
सत पथ का आप मार्ग दिखाये
अंधकार की नागरी से आप बाहर ले आए।

सूर्य की किरणों से आप चमकते जाए
चाँद की शितल चाँदनी फैलाये
कड़ैले सी कड़वी दांत लगाए
भविष्य हमारा आप सजाये।

करू विनती यही आस लगाए
जग का अमृत आप हमे चखाए
पड़े जरूरत तो फटकार लगाए
जीवन को मेरे साकार बनाए।

-संदीप कुमार सिंह ।

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