“मेरी जंग “

चहु और था शोर शराबा ,
भरा हुआ बधाई के लफ्ज़ो से ,
जनमता देख मुझे सब मुस्कुरा रहे थे ,
लेकिन मेरी जंग मेरे अश्को से ||

हर पल स्नेह और प्यार मिला,
आशीर्वाद मिला हर वृद्ध वृद्धा से ,
लेकर मुझको सब खेल रहे ,
लेकिन मेरी जंग मेरी श्रद्धा से ||

बेफिक्र मेरा बचपन बीता ,
रोज़ नयी मंज़िल नए रस्ते में ,
लगे सब मुझसे थे उम्मीद कई ,
लेकिन मेरी जंग मेरे स्कूल के बस्ते से ||

आया यौवन का पड़ाव नया ,
भरा प्यार से रंगो से ,
सबने दी अपनी राय अलग ,
लेकिन मेरी जंग मेरी उमंगो से ||

सजा राखी मेरी मंज़िल सबने अपने हिसाब से,
जूझता रहा पन्नो से भरी किताबो से ,
कोई कहता इस पार सही कोई कहता उस पार सही ,
लेकिन मेरी जंग मेरे ही ख्वाबो से ||

भगा पैसो के पीछे अपनी लाचारी से ,
सीखा बहुत रिश्तो की व्यापारी से ,
सुकून ढूढ़ँ ता रहा अस्तित्व खोता रहा ,
मेरी जंग मेरी ज़िम्मेदारी से ||

लिखा मैंने इतिहास मेरा कुछ पसीने कुछ अपने रक्त से ,
बीता हर दिन मेरा ,कुछ नरम थे पल कुछ सख्त से ,
अपनों के बीच मुस्कुराने का बस यही एक धन लिए जाऊंगा ,
आखिर में मई पता चला मेरी असली जंग मेरे वक़्त से ||

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