अँधेरा तेरे दिल में हैं अँधेरा मेरे दिल में हैं

अँधेरा तेरे दिल में हैं अँधेरा मेरे दिल में हैं , घरो में इन रोशनियों का तू बता क्या हैं फायदा
अपने तेरे इधर भी हैं अपने मेरे उधर भी है , धर्मो की इन लकीरो का तू बता क्या है फायदा

हिन्दू हूँ मै हैं तू मुसलमान , ये मेरा पुराण ये तेरा क़ुरान
मेरी हैं पूजा इबादत हैं तेरी, ये मंदिर की घंटिया ये मज्जिद की अजान

क्या अलग हैं इन नसीहतों में, फिर इस बटवारे का क्या हैं फायदा
दिल तेरा भी जल रहा हैं दिल मेरा भी जल रहा हैं
इस जलजले के साये से तू बता क्या हैं फायदा

क्या हो नही सकते हम एक इस मुल्क के हित के लिए
क्या खेल नही सकते अपने बच्चे इस एकता के प्रीत के लिए

ये हरा रंग में रखता हूँ ये भगवा तू भी रख ले ।
सवैया तेरी मैं खाऊंगा , तू ये खीर मेरी चख ले

खुशियो के इस बाजार में , नफरतो के सामानों का क्या फायदा
हम है सब एक ही यहाँ, यूँ अलग अलग होने का क्या फायदा
अँधेरा तेरे दिल में हैं अँधेरा मेरे दिल में हैं , घरो में इन रोशनियों का तू बता क्या हैं फायदा
अपने तेरे इधर भी हैं अपने मेरे उधर भी है , धर्मो की इन लकीरो का तू बता क्या है फायदा

अंशुल पोरवाल (मनमौजी)
anshulporwalbjp@gmail.com

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