भूलूंगा नहीं

कैसा लगता है
जब पहली बार आठवीं में
घर छोड़कर हॉस्टल गया
भूला नहीं

 

कुछ अलग ही लगा
जब पहली बार अकेले गया
देखने सिनेमा डरते-डरते
भूला नहीं

उत्साह, डर महसूस किया
जब फर्स्ट ईयर में हुई रैगिंग
खड़ा था बेंच पर सबके सामने
भूला नहीं

थोड़ी शरम सी आयी
जब मम्मी ने पूछा कि यह
फ़ोटो वाली पसंद तो है तुम्हें
भूला नहीं

और तब उड़ा था हवा में
जब पापा ने कहा सुधर जा अब
बाप बन गया है नालायक
भूला नहीं

आज लेकर उड़ेगा
यह दुनिया का सबसे बड़ा पंछी
पंछियों के चुराए हुनर से
भूलूंगा नहीं

-मिथिलेश ‘अनभिज्ञ’

Hindi poem on first memories by mithilesh,

hostel life, cinema watch, college life, marriage proposal, being father, fly in the sky, poem, kavita

Leave a Reply