आजाद रहूँगा……..

दुनिया से आजाद हूँ आजाद रहूँगा,
मगर तेरे ख्यालो का गुलाम रहूँगा

रखता हूँ दुनिया के अपने कदमो में
एक बस तुझे अपना सरताज कहूँगा

न कभी डरा हूँ न डरूंगा मुसीबतो से
जीते जी तेरी रुसवाई न सह सकूंगा

जरुरत नही दुनिया के रहमो करम की
गर मिला न तेरा साथ मुर्दा बन रहूंगा

तू मिले न मिले गम नहीं करता “धर्म”
अफ़सोस मगर बिन तेरे जिन्दा न रहूँगा !!

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@——डी. के. निवातियाँ —-@

2 Comments

  1. anuj tiwari 21/11/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 22/11/2015

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