वो दिन…..!

कुछ ऐसे दिन भी गुजरे मेरे, देखे न रातो को तारे मैने !

कुछ व्यस्थ थी मे इतनी अपनी उलझनो मे, न मंदिर देखे न शिवालय देखे !
यादो मे खोई हुई थी उनके ऐसे, न दुनिया के नजारे देखे !
वो हमको भूल ही गये, न जाने कितने जमाने पहले!
उन्हे याद भी न आऐ नन्हे नन्हे तारे मेरे……!
रास्तो से गुजरी जब, सुने दुनिया के ताने मैने !
और उन्हे न दिखे हाथो के छाले मेरे !
चाँद देखे ना सितारे देखे , ङुबती कस्ति ने र्सिफ किनारे देखे…….!

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