तुम बिन

आसमां भी अधूरा है तुम बिन
चांद को मिलती नहीं चांदनी
सूरज की किरणों का स्पर्श भी
भेद नहीं पाता है तुम्हें,
तितलियों का फूलों पे मंडराना
खूशबू का आंचल बिखराना
हवाओं से तेरा बातें करना
रोक नहीं पाता है हमें,
बरसात की हो रिमझिम
या पत्तों की हो झमझम
या गाऐ कोई राग पपीहा
उस पार चकोर संग
कोयल की कूंक भी बेसुरी तुम बिन
तुम सावन का हो मौसम जो
अपने आंगन की याद दिलाता है हमें।

………………… कमल जोशी

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/11/2015

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