सुख की तलाश

सुख ने छोड़ा दामन अपना
अपनों से भी नाता टूटा
पर बेदर्द दुनिया से
नहीं हमें कोई शिकवा
आज शुरू करेंगे
हम अपना सफर
सुख की तलाश में
कहीं तो मिलेगा सुकून
इस दुनिया में
भटकेंगे इधर से उधर
सोयेंगे चैन की नींद
खुदा तेरी छत के नीचे
पानी मिले न मिले
गम के आंसू पी लेंगे हम
भूख कितना भी सताये
जिन्दगी की ठोकर को भी
मुस्कुरा कर सह लेंगे हम
कुछ दिन दुख के
गुजारेंगे इस शहर में
यहां भी सुख न मिला
तो अगले शहर की
दहलीज पर कदम रखेंगे हम
कभी न कभी
वह शहर तो आयेगा
जो मेरी बंजर जिन्दगी में
सुख की बहार लायेगा
कभी तो
सूरज की पहली किरण
मेरे जीवन में
सुख का उजाला लायेगी।

………………… कमल जोशी

One Response

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/11/2015

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