अब बदलना चाहिये |

फुफकारतें हैं जो अकारण ,
उन फनों को अब कुचलना चाहिये |
नफरतों के बीज बोयें जो यहाँ ,
उन सभी को अब मसलना चाहिये |
सूर , तुलसी और नानक ,
का मेरा यह देश है ,,
थोपते हैं बाहरी को देश पर जो ,
ऐसे सभी चेहरों को पंकज अब बदलना चाहिये |
आदेश कुमार पंकज

3 Comments

  1. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 30/11/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 30/11/2015
  3. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 30/11/2015

Leave a Reply