अब लड़ना ही होगा

टाँग खींच बढ़ना चाहे जो ,
वह कभी नहीं बढ़ पायेगा |
मिटा- मिटा लम्बी रेखा को,
वह छोटा न कर पायेगा |
काँच के जिनके घर होतें हैं ,
वे पत्थर नहीं चलातें हैं |
कीचड में जो सने हुए है ,
कीचड वही लुटातें हैं |
मन का गन्दा सदा देखता ,
सारी दुनिया की त्रुटियों को |
वह अपने अन्दर नहीं झाँकता ,
है नहीं देखता कमियों को |
राजनीति के बल पर तुम ,
थोड़ा सा पा जाते हो |
काली करतूतों से अपनी ,
थोड़ा सा बढ़ जाते हो |
यदि जीवन में बढ़ना है तो ,
कर्म तुझे करना ही होगा |
भाग्य सहारा छोड़ यहाँ पर ,
पंकज अब लड़ना ही होगा |
आदेश कुमार पंकज

4 Comments

  1. Gurpreet Singh 19/11/2015
    • आदेश कुमार पंकज ADESH KUMAR PANKAJ 22/11/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 20/11/2015
    • आदेश कुमार पंकज ADESH KUMAR PANKAJ 22/11/2015

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