दर्पण

दर्पण – कभी भी , दोगले होते नहीं |
कायरों में तो कभी हौसलें होते नहीं |
धीर औ गंभीर जो, चुलबुले होते नहीं |
नीवं से मजबूत जो ढुलमुले होते नहीं |
मित्र सच्चे आपके , वो बुलबुले होते नहीं |
पेट जिनका हो भरा वो कुलबुले होते नहीं |
स्वार्थ जिनमें हो भरा वो दिलमिले होते नहीं |
रोशनी भरपूर दें वो , झिल -मिले होते नहीं |
फलहीन होते वृक्ष वो ,झुळझुळे होते नहीं |
सम्पनता से हो भरें वो दिलजले होते नहीं |
सख्त पंकज जो दिखें ,वो पिलपिले होते नहीं |
सम्मान रिश्तों का करें वो मनचले होते नहीं |
आदेश कुमार पंकज

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