यु ही कट रहे है जीवन के नीरस दिन

यु ही कट रहे है जीवन के नीरस दिन अनायास
न कोई आरजू है न कोई ख़ुशी और ना ही प्यार
दर्द इतने मिले है की अब दोस्ती सी हो गयी है
तन्हाई और ख़ामोशीयो से|

वक्त बदला मौसम बदले
गमे दिल का आलम बदलता नहीं
न रूठते है हम और न गम हमसे रूठा है कभी
नम है मेरी आखे आसुओ के धार से
खामोश लव मुस्कुराते नहीं अंगार से|

शिथिल पड़ गए अंग सभी मृतक समान
चल रही सास पर देह है निष्प्राण
भाव न कोई बचा ह्रदय कुन्ज में
मस्तिष्क भी विकल हुआ दुखो के रंज से|

सुन्दर सुबह, सुहानी शाम अब न लुभाएगी कभी
मंद मंद मुस्काती पवन, वर्षाकण और मधुवन
व्यर्थ है ये सभी|

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