आग…………….( मुक्तक )

जब न तुझमे बुराई है, न मुझ में बुराई है
फिर ये नफरत की आग किसने लगाई है !
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लगाने वाले ने तो अपनी रोटिया सेंक ली
पर इसमें जलने वाले तेरे और मेरे भाई है !!

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!!—–डी. के निवातियाँ —-!!

4 Comments

  1. Girija Girija 21/11/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/11/2015
  2. davendra87 davendra87 21/11/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 21/11/2015

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