आकर चली गयी दिवाली

एक बार फिर आकर चली गयी दिवाली
कही दीप जले कही ख़ुशी के फूल खिले !
तो कही गम के जख्म ,छोड़ गयी दिवाली
एक बार फिर आकर चली गयी दिवाली !!

पल भर की बेमानी ख़ुशी के लिए
करोडो ख़ाक में मिला गयी दिवाली !
कही किसी ने खुशियो में चलाये अनार बम
कही किसी की झोपडी जला गयी दिवाली !!

क्या खूब रिवाज देखे इस त्यौहार के
इस दिन जुए की बाजिया जाए खेली !
कही किसी के घर का निकला दिवाला
और किसी के घर मनाई गयी दिवाली !!

एक महल नहाया था सतरंगी रोशनी में
बगल में दिये से चमकी थी एक खोली !
मनाते सब त्यौहार अपने अपने सलीके से
अमीरी गरीबी का भेद बता गयी दिवाली !!

पूजन तो सभी करते विधि विधान से
सभी ने तो सजाई थी पूजा की थाली !
जाने किसके घर वास हुआ लक्ष्मी का
और किसको मालामाल कर गयी दिवाली !!

एक बार फिर आकर चली गयी दिवाली,
कही दीप जले कही ख़ुशी के फूल खिले !
तो कही गम के जख्म ,छोड़ गयी दिवाली,
एक बार फिर आकर चली गयी दिवाली !!

——::0:: डी. के. निवातियाँ ::0::——

2 Comments

  1. राम केश मिश्र राम केश मिश्र "राम" 17/11/2015
    • डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/11/2015

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