भजन

(तर्ज: आजा आजा रे……)
भव से बेडा पार लगेगा
राधे राधे कृष्ण कृष्ण जो भी कहेगा
मन बांवरा है करता है अपनी
विषयों की प्यास यहां कभी नहीं बुझती
संताप उसके मन का मिटेगा
राधे राधे कृष्ण कृष्ण …………
दुनियां के मेले में है खींचातानी
चार दिनों की प्यारे है जिंदगानी
हर हाल मे बस वो ही खुश रहेगा
राधे राधे कृष्ण कृष्ण……………
जीवन की नइया डगमग है डोलती
आओ बचा लो प्यारे ,तुम से है बोलती
तुम सा खिवइया उनको मिलेगा
राधे राधे कृष्ण कृष्ण………………….
देने को तुझको सिर्फ दृग बिंदु हैं
यही है खजाना मोहन यही मेरी हस्ती है
उन्ही आसूओं को सहारा मिलेगा
राधे राधे कृष्ण कृष्ण……………….
राजा हो रंक यहां साधू संत सारे
तेरे ही भरोसे गिरिधर रह्ते है सारे
मन मंदिर में वो उनके मिलेगा
राधे राधे कृष्ण कृष्ण……………
R.K.V.(MUSAFIR)

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