गीत गाता हूं मैं

डम डम डम डीगा डीगा रे ,दिल मे कुछ हुआ हुआ रे
बिन पीये मैं तो साला ,गिरा गिरा गिरा गिरा रे
जाता है तू कहां रे मन ,पल पल तडपाता है रे मन
दिल की खिड्की को खोल के ,उड उड जाता है ये मन
सुन ज़रा रुक ज़रा मान ले कह्ना मेरा ,तू ना पागल बन..
डम डम डम……………………….
जिसको तू चहता है ,मोर बन के नाचता है
आये जब सामने वो ,हिचकोले मारता है
सुन ज़रा रुक ज़रा मान ले कह्ना मेरा ,तू ना पागल बन..
डम डम डम………………….
सुन सुन ओ मनचले ,आंसा नहीं मंजिलें
इक तरफा प्यार में तो .आती हैं मुश्किलें
सुन ज़रा रुक ज़रा मान ले कह्ना मेरा ,तू ना पागल बन..
डम डम डम………………………………….
तेरे चक्कर मे कभी ,पागल ना हो जाऊं कहीं
जोश में तो होश खोना ,होता अच्छा नहीं
सुन ज़रा रुक ज़रा मान ले कह्ना मेरा ,तू ना पागल बन..
डम डम डम……………………………………..
इज़हार करने दे ,अरमां निकलने दे
देखें क्या सोचती वो ,पता तो चलने दे
सुन ज़रा रुक ज़रा मान ले कह्ना मेरा ,तू ना पागल बन..
डम डम डम……………………………………..
R.K.V.(MUSAFIR)
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