ना जाने क्या ये राज़ है

हमसफर मुझे मिल गया ,जादू सा मुझ पे चल गया
फिज़ा में इत्र घुल गया ,मदहोश आलम हो गया
कैसे करूं मैं कुछ बया ,जुदा मैं खुद से हो गया
लमहा लमहा खास है ,अहसास ही अहसास है
ना जाने क्या ये राज़ है…..

अंग अंग जल तरंग ,हर एक पल नई उमंग
मुसकुराता तन बदन , तरसते फिर रहे नयन
सांसों में तैरती अगन, मन प्रेम में डुबा मगन
लमहा लमहा खास है ,अहसास ही अहसास है
ना जाने क्या ये राज़ है…..

साया भी दरमयां नहीं ,दुनियॉ का कुछ पता नहीं
रंगरेज़ रंग ये कौन सा ,चढ जाये तो उतरे नहीं
खुदा से मांगू मैं दुआ ,चलता रहे ये सिलसिला
लमहा लमहा खास है ,अहसास ही अहसास है
ना जाने क्या ये राज़ है…..
RKV(MUSAFIR)
*****

Leave a Reply