छूना है चांद को

छूना है चांद को

यदि तेरा साथ मिले तो
छूना चाहता हूं आसमान को
लगाकर पंख शरीर से अपने
पाना चाहता हूं चांद को ।
तुम साथ मिल जाओ अगर तो
कोई चीज मुष्किल न होगी
जो दूर भागती है मुझसे
वो हर चीज पास में होगी
हर दिन-रात ये अपनी होगी
ओर भला क्या चाहते हो,
लगाकर पंख शरीर से अपने
पाना चाहता हूं चांद को ।
हर जगह हर स्थान पर
तेरा मेरा राज रहेगा
लोग झुकेंगे सलाम करेंगे
ऐसा हमारा नाम होगा
फिर क्या ऐसा काम होगा
जो पूरा कभी न हो,
लगाकर पंख शरीर से अपने
पाना चाहता हूं चांद को ।
-ः0ः-

Leave a Reply