मंजिल तेरे करीब

मंजिल तेरे करीब

उबड़-खाबड़ पगडंडियों पर
धूली भरे रास्ते देखकर
तु घबराना मत ऐ साथी
शायद तेरा आषियाना
तेरे बहुत ही करीब है।
तु चल बढता चल
कांटे मत देख
छालों को चूने दे
पैरों के घाव मत देख
घावों से बहेगा रक्त भी
होगी इनमें पीर अनोखी
पर दुखों के पिछे ही तेरे
फूलों की राहें आयेंगी
जो तेरी इस हार थकान को
बिल्कुल मिटा जायेंगी
सांसे जो फुल चुकी हैं तेरी
उनको शीतल कर जायेगीं
आंखें जो पत्थर-सी हुई हैं
होंगी वो भी स्फुर्ति-दायक
हृदय पाषाण बना है जो
वो हो जायेगा द्रवित
तन की थकान मिट जायेगी
हो जायेगा तन सुघड़-सुकोमल।
-ः0ः-

Leave a Reply