यादों की छाप

यादों की छाप

तुम ही बीते क्षणों की
धुंधली सी छाप बची हो
जिन्हें भूल चुका हूं मैं
उन लम्हों की याद बची हो।
पानी पर छप ध्वनि कर ज्यों
विलीन हो जाती है बूंद
उसी तरह की चंचल मन में
सिमट कर रह गई हो तुम
कभी जब झांक देखता हूं
तुम परछाई सी लगती हो,
तुम ही बीते क्षणों की
धुंधली सी छाप बची हो।
मिट चली हैं वो तस्वीरें
ओर मिट गई वो यादें
भूल चुका हूं मैं उनको
तुमने किये थे जो वादे
जाने फिर क्यों धुंधले आईने में
धुंधली सी तस्वीर बची हो,
तुम ही बीते क्षणों की
धुंधली सी छाप बची हो।
-ः0ः-

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