फिकर नॉट यार अच्छे दिन आयेंगें

मैं जनता दुलहन भोली
कई बार उठी मेरी डोली
किसमत ने किया मजाक
धोखा खा गई मैं हर बार
मेरे होते रहे तलाक
मैं खुब रोई हर बार
मेरा कब सुधरेगा हाल
न जाने कब होगा ये कमाल
ये तो अल्लाह जाने ,ये तो मौला जाने
जात पात न पुछे कोई
जब रिश्ता लेकर आते है
शादी हो जाती है जब
हम न फुटी आंख सुहाते है
भ्र्ष्टाचार सौतन संग ही
फिर हनीमून को जाते है
नहीं सुनाई देती इनको फिर
मेरी पायल की झंकार
चलाते रहते बस सरकार
रिटायर क्यों नही होते यार
ये तो अल्लाह जाने ये तो मौला जाने
मौसम फिर आया इक बार
दुल्हा ऑफर देता यार
अबके खूब करूंगा प्यार
उम्मीद से कर लिया स्वीकार
फिर से नेता ही भरतार
फिर से सब कुछ दिया है वार
न जाने हो कैसा व्यावहार
अबकी बार मेरे भगवान
ये तो अल्लाह जाने ,ये तो मौला जाने
RKV(MUSAFIR)
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