मंथन

सिकंदर ने फक़ीर पर
रहमो करम दिखाया
फरमाया कुछ मांग लो
बेफिक्र फक़ीर ने भी
फिर आइना दिखाया
मेरी धूप छिनने वाले बादशाह
आहों बद्दुआओं से तेरा दामन भरा
तू मेरी झोली क्या भरेगा
खून से सनी हुई खैरात तेरी
नहीं है मेरे काम की
ख्वाहिशें ,ख्वाब ,चादर सब छोटे मेरे
सबकी सलामती की दुआ मांग कर
नींद आती है आराम की
कफन में जेब नही होती फिर
दागी शौहरत ,दौलत किस काम की
RKV(MUSAFIR)
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