मैने जीना सीख लिया

सुबह के इंतजार में रात क्यों बरबाद करूं
चिरागे आरजू रौशन क्यों ना मेरे यार करूं
कितने सूकून से हैं दुनियॉं में रौशनी वाले
जानते सब हैं यहॉ, इस बात पे क्या मैं बात करूं
आगाह हूं हर एक बात से, लेकिन फिर भी
हो के बरबाद भी मैं सबका ऐह्तराम करूं
लोगों ने तोला है मसीहा भी यहॉ तराजू लेकर
मेरी औकात ही क्या, किस किस से मैं तकरार करूं
R.K.V.(MUSAFIR)
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