चाह की राह

चाहती हो बोल दो यूँ न छिपाओ
जो भी मन में है “परदेशी” को दिखाओ,
देखता हूँ कब से मैं तेरी तरफ ही
आज मौका है मुझे सब कुछ बताओ।
न डरो की ये ज़माना क्या कहेगा
जो तू चाहे गी ये देखो वो करेगा,
तुम में गर हिम्मत है इससे टकराने की
ये तूफां भी अब तेरा कुछ न करेगा।
मैं हूँ तेरे साथ तेरा प्यार भी है
साथ “मेरे प्रेम” की बौछार भी है,
डर-डर के अब जीना ऐसे ठीक नहीं
क्यूँ डरती जब साथ तेरा यार भी है।
ऐ ; भरोशा कर तू मुझपे हमनशीं
छोड़ के सारा ज़माना साथ दूंगा,
कह पाई जो तूने दिल की बात तो
आज ही से संग तेरे मैं रहूँगा।।
(इंगित प्रेयसी की स्वीकारोक्ति)……..
कब से तुम दिल में मेरे हो नहीं पता
जन्मों का बंधन सा लगता है रिश्ता,
जब-जब मुखड़े का तेरे दीदार करूँ मैं
अपने ही चेहरे का अश्क सा है दिखता।
दिखता है चेहरे में नूर सितारों सा
पंछी नदियां पर्वत और पहाड़ों का,
करती हूँ मैं हद से ज्यादा प्यार तुम्हें
शंका अंतर्मन में नहीं विचारों का।
अब है आस कि तेरा हरदम साथ हो
मेंहदी लगी हाथों में तेरा हाँथ हो,
तू ही भरे अब मांग मेरी सिन्दूरी से
है विनती प्रभु से तू मेरा नाथ हो।
है वचन देती हूँ तुमको लो अब आज मैं
तेरी ही धुन पे बन मीरा नाचूँगी,
गर मिला साथ तेरा इस नीरस जीवन में
तो नाम की माला लेकर तेरी बांचूँगी।।

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 15/11/2015
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 15/11/2015

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