भजन

( मेहरबां हो जा एक बार मैंनें जोर से पुकारा उसको
आवाज़ ये आयी के मेहरबानी है मेरी जो तू पुकारता है मुझे )
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मैं पतंगा हूं तू लौ ,श्याम मेरे ऐसा क्यूं……..4..
1:- चित हर लिया है तूने मेरा ,कुछ न रहा अब मुझ में मेरा
मुझे आता नज़र हर सू ,श्याम मेरे……….
मैं पतंगा हूं……….
2:- जब से तुम से नयन मिले हैं ,इक पल भी न चैन मिले है
मेरा ख्याल रक्खे न तू ,श्याम मेरे……….
मैं पतंगा हूं……….
3:- हर दम तेरे मिलन की तृष्णा ,स्वांस स्वांस बोले कृष्ण कृष्ण
( हरेकृष्ण हरेकृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ,हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे )
हर दम तेरे……..स्वांस स्वांस बोले……
मुझे तरसाता है तू ,श्याम मेरे………
मैं पतंगा हूं………..
4:- विरह की आग में जल जल जाऊं ,दिल की बात भी कह नहीं पाऊं
मुझे तड्पाता है तू ,श्याम मेरे …….
मैं पतंगा हूं………….
5:- तेरी प्रीत की रीत को मैं न जानू ,तुम मेरे हो बस इतना ही जानू
मुझे प्राणों से प्यारा तू ,श्याम मेरे आ जा तू
अब तो आ जा तू श्याम मेरे आ जा तू
मैं पतंगा हूं…………………
R.K.V.(MUSAFIR)
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