मॉग का तारा

( करीब 25 साल पह्ले की सच्ची घटना है ,एक स्त्री के विधवा होने के दर्द को महसूस किया था और उसके अहसास को बया करने का प्रयास किया था )

चुनरी तारों भरी देकर मुझको ,मेरी मॉग का तारा टुटा है
ओझल हुआ देखते – देखते ,न जाने कहॉ खो गया है
कोई तो बताये मुझको ,मेरे माथे का सूरज ,कहॉ है डुबा
कहॉ है डुबा ,कहॉ है डुबा……..
चुनरी तारों भरी…………

बीच राह में जीवन पथ पर ,रथ का पहिया टुटा है
तन्हा सफर अब कटेगा कैसे ,चुडियों का संग भी छुटा है
कोई तो बताये मुझको ,मेरे माथे का सूरज कहॉ है डुबा
कहॉ है डुबा ,कहॉ है डुबा……..
झोली तारों भरी…………

मुझको ही देखे सब आते जाते ,खामोश है सब रिश्ते नाते
मेरे जीवन को महकाने वाला ,क्यो निशब्द हो गया है
कोई तो बताये मुझको ,मेरे माथे का सूरज कहॉ है डुबा
कहॉ है डुबा ,कहॉ है डुबा……..
झोली तारों भरी………..
RKV(MUSAFIR)
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