मुक्ति

(मुक्ति)
रिक्तता का आदमी से गहरा नाता है
रिक्तता भरने ही तो दुनियॉ मे आता है
भुख प्यास प्यार पूजा जिंदगी के साज़ है
चाहे अनचाहे सही पर सुर लगाना पडता है
रिक्तता जादूगरी है जग के दाता की
उलझ पुलझ के आदमी को मर जाना पडता है
रिक्त मन हो बांसुरी सा जिसका दुनियॉ मे
उसको ही परमत्मा अधरो से लगाता है
रिक्तता से आदमी फिर मुक्ति पाता है
RKV(MUSAFIR)

One Response

  1. Shishir "Madhukar" Shishir 15/11/2015

Leave a Reply