“आब-ए-आइना” डॉ. मोबीन ख़ान

तेरा ए हुस्न, आब-ए-आइना रखता है।
तभी तो खुदा, हर वक़्त तुझ पर नज़र रखता है।।

ज़माने में कहाँ, इतनी तहज़ीब बची है।
इसलिए हर वक़्त, वो ज़माने की ख़बर रखता है।।

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