अधूरा सपना

समय का होता मुझपे
बार-बार प्रहार
मजबूरीयों में गिरता-पड़ता
मई हूँ बेहाल
कम न आए मेरा कोई भी यार
फिर भी करता मै
सब से प्यार ।

चला जाता हूँ मै
रोज़ सपनों के पार
पर हो न पाऐ मेरा
सपना साकार
कुछ ऐसा काम तुम
करो मेरे यार
अपना सपना तुम
कर लो साकार, कर लो साकार

हम तो यहाँ से निराश गए,
अब आई तुम्हारी बारी ।
जो करना है आज करो,
समय चला जाए न खाली ॥

-संदीप कुमार सिंह ।

4 Comments

  1. डी. के. निवातिया dknivatiya 14/11/2015
    • संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 14/11/2015
  2. Shishir "Madhukar" Shishir 14/11/2015
    • संदीप कुमार सिंह संदीप कुमार सिंह 14/11/2015

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