एक छोटी सी बात

प्रतिरोध की
समस्त दीवारें ध्वस्त कर
भावुकता की रूआंसी चादर बिछाकर
किस्से कहानियों की हवाला देती
जाने कितनी रातें और
यूं ही फुटपाथ पर गुजर जायेंगी,
आसमां तो बहुत विशाल है
पर कौन जाने कब
दम तोड़ देंगी
सड़कों से बतियाती आवाजें
या फिर छिन जायेगी
परकटे पंछियों से उनकी आजादी,
सुखों की स्मृतियां भी मिट जाती हैं
सागर में उठते झाग की तरह
व्याकुल निष्ठुर क्षण पढ़ाते
जड़त्व का पाठ शिला की तरह
जीवन का एक टुकड़ा खोजते-खोजते
खो जाती हवाओं में सारी
कोरी कल्पनाऐं
रह जाती है तो सिर्फ
जिन्दगी की धूप-छांव के बीच
कर्तव्यों से परिचय कराती
एक छोटी सी बात।

………………… कमल जोशी

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir 14/11/2015

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