“मज़ाक” डॉ. मोबीन ख़ान

दिल से कोई नहीं चाहता, उनके ग़म कम हों।
लोगों ने उन्हें, मज़ाक का ज़रिया बना लिया।।

जब वो हंसे, तो लोग ज़रा सा मुस्कुराये।
पर जब वो रोये, तो सारा ज़माना मुँह छुपा के हंस लिया।।

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