बादल

बादल

नई सदी का नया सूरज
बिखेर रहा छरहरी छटा,
प्रतिपल यामिनी चमक-दमक
दिखा रही है खेल नया।
काले श्वेत मखमली मेघों में
कभी-कभी झांकता सूरज
सात टुकों मेें विभाजित हो
क्षितिज के दूसरे छोर पर
मस्तक गगन को छुकर
पैर पृथ्वी पर टिके हए
अविचल उचक खड़ा दिख रहा
प्रतिपल यामिनी चमक-दमक
दिखा रही है खेल नया।
कभी नाग से फुंकारते बादल
या फिर मखमली मक्खन से श्वेत
ईधर-ऊधर अंधे भांति
भटकते फिरते फिके बादल
भरकर आगोष में सिमटते हुए
छुपम-छुपाई खेलते बादल।
कर रहे हैं दास्तान बयां
नई सदी का नया सूरज
बिखेर रहा छरहरी छटा,
प्रतिपल यामिनी चमक-दमक
दिखा रही है खेल नया।
-ः0ः-

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