सर्दी में धरती

सर्दी में धरती

सुबह सर्दी का मौसम
और छाये कुहासे में
हाथ को हाथ भी जब
दिखाई ही न दे
यकायक………………….
जब चीरता हुआ
कुहांसे को
सूर्यदेव निकलता है।
पूर्व की ओर से तो
छट जाता है वह
धरती खिल उठती है
चमक-दमक लिये।
वह अपने तन पे।
महक उठती हैं
सारी फिजायें
गाती है भोर सुहानी
छेड़ती हैं धुन हवाएं
चहक उठते हैं पंछी
नाच उठती हैं दिषाएं।
-ः0ः-

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