छाप

छाप

तुम्हारा चेहरा
धूमिल होकर भी
मिटने का नही है।
मन-मस्तिष्क से
जब भी तुम
सामने आती हो
छाप अलग ही अपनी
मन पर छोड़ जाती हो।
-ः0ः-

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  1. Gurpreet Singh 13/11/2015

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